माटी'क घर आ फूस'क चार नीक लागैत अछि !हमरा गाम'क गप-व्यवहार नीक लागैत अछि !!गेल छलहुँ हम डेढ़ बरख पर,अप्पन सुंदर गाम !!लाल- लाल लिच्ची छल लुधकल,हरियर-पीयर आम !!आम'क चटनी के'र चटकार नीक लागैत अछि !हमरा गाम'क गप-व्यवहार नीक लागैत अछि !!रवि, बृहस्पति आ मंगल दिन,ओतय लागैत अछि हाट !शहर'क माल'क बात करब कि,जखन देखब ओ ठाठ !हटिया पर'क बात-विचार नीक लागैत अछि !हमरा गाम'क गप-व्यवहार नीक लागैत अछि !!हरल-भरल सुषमा संपन्न थिक,ई प्रकृति'क बेटी !मोन करैत अछि एकर कोरा में,भs निचिंत हम लेटी !प्रकृति सुता'क सहज श्रृंगार नीक लागैत अछि !हमरा गाम'क गप-व्यवहार नीक लागैत अछि !! एखनहु बुझलहुँ कि ने बुझलहुँ,ई थिक मिथिला धाम !जतय जनमली सीता मैय्या,जतय ब्याहल राम !!गंडक, कमला के'र जलधार नीक लागैत अछि,हमरा गाम'क गप-व्यवहार नीक लागैत अछि !!
Jitender Kumar Jha
Sijaul ,Mailam(madhubani)

धन्य-धन्य ओ मिथिला महान, हम सब छी जकर संतान ।
ReplyDeleteविश्व करैछ जकर गुणगान, धन्य-धन्य ओ मिथिला महान ।।
रामक सासुर छैन जाहि ठाम, कपिल, कणाद, गौतमक स्थान ।
सुर, नर, मुनि करैछ जकर यशगान, धन्य-धन्य ओ मिथिला महान ।।
सनातन धर्मक जखन भ गेल लोप, नास्तिक सभक सभतरि पसरि गेल कोप ।
तखनहु मिथिला में छल धर्मक इजोत, सामवेदक मंत्रोच्चार सॅ ओतप्रोत ।।
आदि शंकराचार्यक अछि इ प्रसंग, शास्त्रार्थ केला मंडन ओ भारतीक संग ।
वैदिक धर्मक पुन: भेल विस्तार, विश्व देखलक मिथिलाक संस्कार ।।
मैथिल होएबा पर अछि हमरा अभिमान, अतिथि सत्कार अछि जकर धर्मप्राण ।
सुर, नर, मुनि करैछ जकर यशगान, धन्य-धन्य ओ मिथिला महान ।। धन्य-धन्य ओ मिथिला महान ।।।
मुंबई बसु वा दिल्ली, चाहे कोलकाता, आसाम |
ReplyDeleteमैथिल भाई हमर प्रणाम । मैथिल भाई हमर प्रणाम ।।
मिथिला के गौरव थिक मैथिल, निज गौरव के ध्यान करी ।
राजा जनक के मान के राखी, सीता के गुणगान करी ।।
नेपाल बसी वा लंदन, चाहे अमेरिका, जापान ।
मैथिल भाई हमर प्रणाम । मैथिल भाई हमर प्रणाम ।।
मिथिला के जन-जन थिक मैथिल, शान अपन सदिखन राखब ।
अपन भाषा अपन पाबनि, कखनो नहि आहॉ बिसरब ।
पटना बसी वा रांची, चाहे एमपी, राजस्थान ।
मैथिल भाई हमर प्रणाम । मैथिल भाई हमर प्रणाम ।।
“मिथिला लाईव” में नित आबी अहॉ सब, निज भाषा के प्रचार करी ।
ऑफिस में अहॉ काज करी वा जे अपन रोजगार करी ।
अहॉ सरस नहि बिसरब, मिथिला के पान-मखान ।
मैथिल भाई हमर प्रणाम । मैथिल भाई हमर प्रणाम
बीसबीं शदी कॆ मध्य तक दरभंगा नगर ब्रह्मण राज कुल की राजधानी रहा था | दरभंगा नगर मिथिला का पर्यायवाची शब्द बन गया | इस समय दरभंगा का निवासी मिथिला का निवासी माना जाता था | मिथिला उसी समय सॆ बिहार् का एक जिला भी था | मुसलिम विजय कॆ पश्चात मिथिला की राजधानी गियास् उद्दिन् कॆ पुत्र मॊहम्मद्द् तुगलक द्वारा दरभंगा नगर मॆं स्थापित की गयी लॆकिन उसका नाम तुगलक पुर अथवा "तिरहुत" हुआ |
ReplyDeleteइसि कारण मिथिला कॊ भी तिरहुत कहा जाता है | उस समय इसका नाम दरभंगा नहि था | यहाँ तक की कवि विद्यापति कॆ भी किसि ग्रन्थ् मॆं दरभंगा का नाम् नहि अया है | इससॆ यॆ पता चलता है कि दरभंगा का नाम ऒइन्बार कुल कॆ सातवॆं राजा शिवसिंह् कॆ बाद् का है |
कुछ लॊग मनातॆ हैं की दरभंगा कॊ दरभंगी खाँ नॆ बसाया था | इसि सॆ इसका नाम दरभंगा पड़ा | पर उससॆ पहलॆ प्रनित गङानन्द का ब्रिङ् दूत नामक पुस्तक जिसमॆं राजधानि कॆ रुप मॆं दरभंगा का रॊचक वर्णन किया गया है | कतिपय विद्वान् यह् भी कह्तॆ सुनॆ जातॆ हैं कि वह् नगर "द्वार बँग" का द्वार है इसि लियॆ इसका नाम "द्वार बँग" हुआ | दरभंगा इसी का बिगड़ा हुआ रुप है | पर कुछ लॊग कह्तॆ है कि इस नाम कॊ नहिं माना जा सकता क्यॊकीं इस द्वार कॆ बारॆ मैं कॊइ नहि जानता ना ही इतिहास कॆ किसी पुस्तक मॆं इसका जिक्र है की कब यॆ बना और कहाँ था |
दरभंगा कॆ नाम पर मुख्यतह् दॊ मत है जिसमै सॆ दरभंगा खाँ कॆ नाम पर अधिकतर लॊग यकीन करतॆ हैं |
दरभंगा कॊ आज मिथिला की राजधानी कॆ रुप मैं जाना जाता है | आज यहाँ पर अनॆक पयर्टन स्थल हॊ गयॆ हैं | दरभंगा कॆ इतिहास कॆ बारॆ मॆं अधिक जाननॆ कॆ लियॆ मिथिलालाइभ इतिहास दॆखॆं | जॊ की बहुत
आई पूरे विश्व भर मे करोड़ोँ मैथिल पसरल छथि आ इन्टरनेट एक दोसर मैथिल केँ जोड़बाक लेल सबसँ महत्वपूर्ण साधन थीक. "कतेक रास बात" इन्टरनेट पर मैथिली साहित्य सृजन एवम मैथिली साहित्य प्रकाशन’क लेल एकीकृत मँच प्रदान करैत अछि. नवम्बर २००४ मे एकर शुरुआत हम केलहुँ आ आई धरि एकर २८१४२ टा पाठक छथि. कतेक रास बात’क शुरुआतकर्ता'क रुप मे हमरा ई घोषित करबा मे बहुत हर्ष भऽ रहल अछि जे नवम्बर २००४ मे शुरुआत भेल ई प्रयोग आई सफल लागि रहल अछि. सफल किएक नहि हो, जखन हमरा लऽग मे २२ टा रचनाकार’क टीम अछि आ एखन धरि १०० रचना प्रकाशित काएल जा चुकल अछि. पहिल रचना हमर छल आ १००वाँ रचना श्री विवेकानन्द झा छथि.
ReplyDeleteजेना पहिने कहल जा चुकल अछि जे कतेक रास बात मैथिली साहित्य सृजन एवम प्रकाशन’क लेल एकीकृत मँच प्रदान करैत अछि, एहि बात सँ बेसी महत्वपूर्ण अछि जे एहि निकाय मे २२टा रचनाकार’क अलावा 28142 टा पाठक छथि. रचनाकार आ पाठक’क एहि निकाय मे महत्वपूर्ण योगदान करय वाला व्यक्ति केँ कतेक रास बात’क टीम अपन वार्षिकोत्सव मे पुरस्कृत करबाक ठानि नेने छल. 2008 मे मैथिली भाषा केँ इन्टरनेट पर आनय मे जे कोनो भी व्यक्ति योगदान केने होइथि कतेक रास बात’क टीम हुनका अपन वार्षिकोत्सव मे पुरस्कृत करबाक योजना बनेने छल. पुरस्कार विभिन्न श्रेणी मे राखल गेल छल — जेना (१) कतेक रास बात’क अलावा सर्वश्रेष्ठ ब्लोगर (२) कतेक रास बात पर प्रकाशित सर्वश्रेष्ठ कथा’क लेखक (३) कतेक रास बात पर प्रकाशित सर्वश्रेष्ठ कविता’क कवि (४) कतेक रास बात पर अपन आलोचनात्मक सँगहि साकारात्मक टिप्पणी देब’ वाला पाठक.
कतेक रास बात वार्षिकोत्सव, दिसम्बर २०, २००८ केँ बँगलोर’क कन्फिडेन्ट कैस्केड नामक रेसोर्ट मे मनेबाक निर्णय काएल गेल. बँगलोर मे रहय वाला लगभग १०० मैथिल परिवार केँ निमन्त्रण देल गेल. मुदा समयाभाव, छुट्टी’क मौसम इत्यादि’क कारणेँ ३२ टा मैथिल परिवार एहि लेल एकत्रित भेल. एहि पूरे कार्यक्रम केँ हम अपनहिँ व्यवस्थापक छलहुँ. आ कार्यक्रम’क सँचालन कतेक रास बात’क सम्पादक मण्डली’क सदस्य श्री कुन्दन कुमार मल्लिक केलैथ मुदा केशवजी’क हाजिर जवाबी कार्यक्रम केँ रोचक बना देलक.
एहि कार्यक्रम मे पहिने प्रत्येक परिवार अपन परिचय देलैथ. एहि मे दू तरह’क प्रतियोगिता राखल गेल छल. पहिल जे अविवाहित मैथिल अपन देल गेल परिचय आ बाद मे पुछल गेल प्रश्न’क आधार पर सबसँ नीक मैथिल पति-पत्नी केँ चुनताह. आ ओकर बात अपन परिचय आ बाद मे पुछल गेल प्रश्न’क आधार पर लेडीज लोकनि सर्वश्रेष्ठ विवाह योग्य यूवक केँ चुनतीह. एहि प्रतियोगता मे कतेक रास बात’क टीम केँ भाग नहि लेबाक छलन्हि. कुन्दन जी आ केशव जी कार्यक्रम’क सँ सँचालन नीक सँ केलैथि. कार्यक्रम रोचक छल.
परिचय एवम एहि प्रतियोगिता’क उपरान्त सास्कृतिक कार्यक्रम’क आयोजन छल. कार्यक्रम’क शुरुआत काएलथिन्ह श्री अविनाश झा जे दू गोट मैथिल गीत सुनौलन्हि. पहिल विद्यापतिक गीत एवम दोसर श्रृँगार रस एक गोट गीत. लागैत छल जे ओ पूर्ण व्यवसायिक कलाकार छथि. हुनकर उर्जा केँ देखि हमर पत्नी "अल्पना" से प्रेरित भऽ गेलीह आ विद्यापति रचि मोरे रे अँगनमा सँ सबकेँ स्तब्ध कऽ देलथिन्ह. हुनका मे से मेधा’क समायोजन अनायासे देखबा मे आयल. विनोद झा जी द्वारा फिल्म शोले’क डायलोग केँ मैथिली मे बाजि वाहवाही लुटलाह. मुरारी झा’क गीत एहि मे एकटा नव आयाम जोड़ि देलक.
राति मे भोज’क आयोजन से छल. भोज’क उपरान्त प्रतियोगिता’क विजेता घोषित काएल गेल. कार्यक्रमोपरान्त श्री विभुति कुमार झा एवम हुनक पत्नी केँ सर्वश्रेष्ठ मैथिल पति-पत्नी श्री अविनाश झा एवम हुनक पत्नी केँ रनर-अप घोषित काएल गेल. सुपौल निवासी श्री विशाल वर्मा केँ बेस्ट एलिजिबल बैचलर एवम श्री सन्दीप रँजन केँ रनर अप घोषित काएल गेल. एकर बाद सबसँ कतेक रास बात’क मुख्य पुरस्कार’क घोषणा काएल गेल. पुरस्कार विजेता निम्न लोक छथि.
१. मैथिली भाषा’क सर्वश्रेष्ठ ब्लोगरः- श्री हितेन्द्र गुप्ता (पत्रकार सहारा समय)
२. डा० अशोक सिँह तोमरः- विभागाध्यक्ष सहरसा कालेज सहरसा
३. सर्वश्रेष्ठ कवि: श्री शुभाष चन्द्र (पत्रकार, नई दिल्ली)
४. सर्वश्रेष्ठ पाठक-टिप्पणीकार: श्री निशान्त कुमार एवम श्रीमती रँजना सिँह
सब लोकनि एहि बात पर सहमत छलाह जे एहेन तरह’क कार्यक्रम आयोजन प्रत्येक तीन महीना पर हो. प्रत्येक सहभागी केँ एक एक कोहबर पेन्टिँग दैत कार्यक्रम समापन’क घोषणा काएल गेल.- - जौं अहाँ एहि ब्लॉग पर लिखय के इच्छुक
जितेन्द्र जी;
ReplyDeleteएना "कतेक रास बात" पर प्रकाशित रचना केँ चोरा कय एहिठाम प्रकाशित केनाय बन्द करू। एहि सन्दर्भ मे अहाँ के एकटा मेल [jitenderkumar_j@yahoo.com] सेहो पठायल गेल छल। जकर जबाब एखन धरि अहाँ नहि देलहुँ। एहि टिप्पणीक माध्यम सँ हमरा लोकनि अहाँ सँ एक बेर फेर आग्रह कय रहल छी जे एहि रचना के अविलम्ब एहिठाम स' हटाबी अन्यथा हमरा लोकनि केँ Copyright Act आ Intellectual property right act केर तहत अहाँ पर कानूनी कार्रवाई करय पडत।
धन्यवाद।
कुन्दन कुमार मल्लिक,
सम्पादक,
"कतेक रास बात"
मोबाइल- +91-97390 04970