Thursday, December 11, 2008

माटी'क घर आ फूस'क चार नीक लागैत अछि !हमरा गाम'क गप-व्यवहार नीक लागैत अछि !!गेल छलहुँ हम डेढ़ बरख पर,अप्पन सुंदर गाम !!लाल- लाल लिच्ची छल लुधकल,हरियर-पीयर आम !!आम'क चटनी के'र चटकार नीक लागैत अछि !हमरा गाम'क गप-व्यवहार नीक लागैत अछि !!रवि, बृहस्पति आ मंगल दिन,ओतय लागैत अछि हाट !शहर'क माल'क बात करब कि,जखन देखब ओ ठाठ !हटिया पर'क बात-विचार नीक लागैत अछि !हमरा गाम'क गप-व्यवहार नीक लागैत अछि !!हरल-भरल सुषमा संपन्न थिक,ई प्रकृति'क बेटी !मोन करैत अछि एकर कोरा में,भs निचिंत हम लेटी !प्रकृति सुता'क सहज श्रृंगार नीक लागैत अछि !हमरा गाम'क गप-व्यवहार नीक लागैत अछि !! एखनहु बुझलहुँ कि ने बुझलहुँ,ई थिक मिथिला धाम !जतय जनमली सीता मैय्या,जतय ब्याहल राम !!गंडक, कमला के'र जलधार नीक लागैत अछि,हमरा गाम'क गप-व्यवहार नीक लागैत अछि !!

Jitender Kumar Jha

Sijaul ,Mailam(madhubani)